Lawyers Collective along with Cehat made joint submissions to the MoWCD on National Child Protection Policy”

Statement by the Lawyers Collective on CBI raids on its office and homes and offices of Ms. Indira Jaising and Mr. Anand Grover

The Lawyers Collective and its Trustees, Ms. Indira Jaising and Mr. Anand Grover, express shock, anger and indignation on the simultaneous raids carried out by the CBI on 11 July 2019 at their offices and residences in Delhi and Mumbai. The searches, which went on past mid-night at our Mumbai office, were purportedly in relation to the alleged violations of the Foreign Contribution Act, 2010 (FCRA) by the Lawyers Collective, appellate proceedings in relation to which are pending before the Bombay High Court since 2017. The CBI’s actions are illegal, mala fide and a blatant abuse of law. In January 2016, a team deputed by the Ministry of Home Affairs (MHA) had conducted an inspection of the accounts and records of the Lawyers Collective over 5 days. They were authorized to exercise powers of seizure of accounts and records as well as call for documents and examine persons acquainted with the facts of the case. Under the FCRA, such powers can be exercised if the inspecting officers suspect any violation of the FCRA or any other related law. No such powers were exercised by the inspection team at the time. The Lawyers Collective had fully co-operated with the FCRA authorities and handed more than 1,000 pages of documents on request.

The FCRA authorities did not think it fit to initiate criminal proceedings at the time of inspection or even later, after cancellation of the Lawyers Collective’s registration in 2016. Since the registration of the FIR against the Lawyers Collective on 13 June 2019, its functionaries and office bearers have been available at their respective stations to provide any information or documents that the CBI may require. However, the CBI did not even bother to approach the functionaries, let alone issue summons, as mandated by law. Instead, it proceeded to search their professional and residential premises, contrary to law. Yesterday’s raids by the CBI in relation to the very same FCRA documents, which the MHA had inspected and taken copies of 3 and ½ years ago. The CBI could well have summoned the documents but they took the action to raid and humiliate Ms. Indira Jaising and Mr. Anand Grover. The CBI’s actions are totally unwarranted, illegal and amount to gross abuse of the process of law. Worse still, the CBI issued a press release even as the search was going on in the Lawyers Collective’s Mumbai office. The events only reconfirm the malicious nature of the FCRA proceedings against the Lawyers Collective and its functionaries. The FIR and the raids carried out are nothing but a vicious means to humiliate, intimidate and silence its Trustees, Ms. Indira Jaising and Mr. Anand Grover, whose fierce independence and advocacy for human rights, perturbs the political establishment of the day. The arbitrariness and mala fide intent of the Government is further revealed by the fact that the MHA has cancelled the registration of 18,867 NGOs under the FCRA, 2010. None of them have been subjected to any criminal prosecution. The Lawyers Collective has been targeted because of the nature of cases that Ms. Jaising and Mr. Grover have taken up in their professional capacity, including those against the leading figures of the ruling dispensation in various sensitive cases. The premises raided today include lawyers’ offices, which retain professional and privileged communication between advocates and clients including those stigmatized because of HIV or other status. The CBI raids are improper and deplorable, on this count too. The Lawyers Collective will take appropriate action against these unlawful and vindictive actions, in accordance with law.

इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर के घरों और दफ़्तरों पर सीबीआई की रेड पर लॉयर्स कलेक्टिव का बयान

लॉयर्स कलेक्टिव एवं उसके संरक्षक, इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर ने 11 जुलाई 2019 को दिल्ली और मुम्बई स्थित दफ़्तरों और घरों में सीबीआई की एकसाथ की गई छापेमारी पर आश्चर्य, क्रोध और रोष व्यक्त किया। आधी रात में, मुम्बई दफ़्तर पर की गई छापेमारी जो कथित रूप से लॉयर्स कलेक्टिव द्वारा विदेशी चंद अधिनियम कानून, 2010 के उल्लंघन से संबंधित थी, उसकी अपीलीय कार्यवाही 2017 से ही बॉम्बे हाइकोर्ट में लंबित है। सीबीआई द्वारा की गई छापेमारी ग़ैरकानूनी, दुर्भावनापूर्ण और कानून के अतिरेक दुष्प्रयोग से प्रेरित है। जनवरी 2016 में ही गृह मंत्रालय द्वारा प्रतिनियुक्त 1 टीम ने पहले ही 5 दिनों से अधिक लॉयर्स कलेक्टिव के खातों और दस्तावेज़ों की जाँच की थी। उस समय भी वे खातों और दस्तावेज़ों के अभिग्रहण के साथ-साथ दस्तावेज़ों की मांग और मामले से संबंधित व्यक्तियों की जाँच करने के लिए अधिकृत थे। एफसीआरए के अंतर्गत ऐसी शक्तियों को तभी प्रयोग में लाया जा सकता है, जब जाँच अधिकारी को संदेह हो कि एफसीआरए व उससे जुड़े किसी कानून का किसी भी प्रकार उल्लंघन किया गया है। उस समय जाँच टीम द्वारा ऐसी किसी भी शक्ति का प्रयोग नहीं किया गया था। लॉयर्स कलेक्टिव ने एफसीआरए अथॉरिटी के अनुरोध पर एक हज़ार पन्नों से ज़्यादा के दस्तावेज़ सौंपे थे एवं जाँच में पूरी तरह से सहयोग किया था। उस समय या बाद में जब 2016 में लॉयर्स कलेक्टिव का पंजीकरण रद्द किया गया था तब भी एफसीआरए अथॉरिटी ने लॉयर्स कलेक्टिव के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही की शुरुआत करना सही नहीं पाया था। 13 जून 2019, जब-से एफआईआर का पंजीकरण हुआ तब से लॉयर्स कलेक्टिव के सारे कार्यकारी एवं पदाधिकारी सीबीआई जाँच से जुड़े किसी भी प्रकार के दस्तावेज़ एवं जानकारी प्रदान करने के लिए अपने-अपने यथास्थान पर उपलब्ध रहे हैं। हालाँकि सीबीआई ने संस्था के कार्यकारियों तक पहुँचने की कोशिश नहीं की या किसी भी प्रकार का सम्मन जारी नहीं किया, जैसा कि कानूनन उचित है। इसके विपरीत सीबीआई ने ग़ैरकानूनी ढंग से कार्यवाही करते हुए दफ़्तरों और व्यक्तिगत आवासों पर छापेमारी की, जो कानून के विपरीत है। कल सीबीआई द्वारा की गई छापेमारी उसी एफसीआरए दस्तावेज़ से संबंधित है, जिसकी गृह मंत्रालय ने 3 या साढ़े तीन साल पहले जाँच की थी और प्रतियाँ ले गई थी। सीबीआई इन दस्तावेज़ों को प्राप्त करने के लिए सम्मन भेज सकती थी|

सीबीआई की रेड इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर को अपमानित करने की मंशा से की गई थी| सीबीआई द्वारा किया गया यह कार्य अनुचित, ग़ैरकानूनी एवं कानूनी प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग है। निराशाजनक तो ये है कि सीबीआई ने उस वक़्त प्रेस विज्ञप्ति जारी की, जब लॉयर्स कलेक्टिव के मुम्बई दफ़्तर में छापेमारी चल रही थी। ये सभी घटनाएँ इस बात की पुनः पुष्टि करती हैं कि लॉयर्स कलेक्टिव एवं उसकी कार्यकारिणी के विरुद्ध एफसीआरए कार्यवाहियाँ दुर्भावना से प्रेरित हैं। यह एफआईआर एवं छापेमारी मात्र इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर को अपमानित करने, डराने और उन्हें चुप कराने की शातिर योजना है, क्योंकि इन्होंने हमेशा मानव अधिकार के पक्ष में स्वतंत्र और प्रबल आवाज़ें उठाई हैं, जो कि मौजूदा सरकार को पसंद नहीं आ रही हैं। सरकार के बेतुके रवैये एवं द्वेषपूर्ण मंशा का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि गृह मंत्रालय द्वारा 2010 में, 18867 एनजीओ का पंजीकरण रद्द किया गया, जबकि उनमें से किसी के भी विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही नहीं कि जा रही थी। लॉयर्स कलेक्टिव को इसलिए निशाना बनाया गया है, क्योंकि इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर ने अपनी-अपनी पेशेवर योग्यता में जिस तरह के मुक़दमे लिए हैं, उनमें खास तौर पर वो संवेदनशील मामले भी शामिल हैं, जो कि सत्तारूढ फ़ैसलों के ख़िलाफ़ रहे हैं। जिन वकीलों के यहां छापेमारी की गई वहाँ लॉयर्स कलेक्टिव के दस्तावेज़ों के अलावा अनेक मुवक्किलों के दस्तावेज़ भी रखे होते हैं, जिनकी जानकारी वकील और क्लाइंट का एकाधिकार है। कुछ क्लाइंट तो ऐसे भी हैं जो एचआईवी एवं अन्य गंभीर समस्याओं से ग्रस्त हैं और नहीं चाहते कि ये जानकारी उनके वकील के अलावा किसी के हाथ लगे। सीबीआई की कार्यवाही इस बिंदु पर भी अनुचित और खेदजनक है। इन ग़ैरकानूनी और प्रतिशोधात्मक कार्यवाहियों के विरुद्ध लॉयर्स कलेक्टिव कानून सम्मत उचित कार्यवाही करेगा।

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